भारतीय प्रौद्योगिकी जगत और वैश्विक ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर उद्योग के लिए आज का दिन एक अपूरणीय क्षति लेकर आया है। ‘केपीआईटी टेक्नोलॉजीज’ (KPIT Technologies) के सह-संस्थापक और समूह अध्यक्ष रवि पंडित का आज सुबह पुणे में निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि उनके अंतिम समय में उनका परिवार उनके साथ था।
रवि पंडित का जाना भारतीय आईटी (IT) क्षेत्र के उस स्वर्णिम युग के अंत जैसा है, जिसमें भारत ने सेवाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर ‘डीप टेक’ और सॉफ्टवेयर-परिभाषित वाहनों (Software-Defined Vehicles) में अपनी धाक जमाई।
एक साधारण शुरुआत से वैश्विक नेतृत्व तक
रवि पंडित की कहानी 1990 के दशक में पुणे से शुरू हुई थी। पेशे से एक उत्कृष्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के बावजूद, उनकी दृष्टि हमेशा भविष्य की ओर थी। उन्होंने 1990 में किशोर पाटिल के साथ मिलकर ‘कीर्तने एंड पंडित इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज’ (KPIT) की नींव रखी। उस समय जब अधिकांश भारतीय आईटी कंपनियां जेनेरिक सेवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं, पंडित ने ऑटोमोटिव क्षेत्र की विशिष्ट सॉफ्टवेयर जरूरतों को पहचाना।
उनके नेतृत्व में केपीआईटी ने 15 देशों में अपना विस्तार किया। आज यह कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों (OEMs) के लिए एक अनिवार्य भागीदार है। ऑटोनॉमस ड्राइविंग (स्व-चालित कारें), इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण) और कनेक्टेड वाहनों के क्षेत्र में आज केपीआईटी का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
रवि पंडित ने बहुत पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि भविष्य की कारें “पहियों पर चलने वाले कंप्यूटर” होंगी। उन्होंने कंपनी को सॉफ्टवेयर और मोबिलिटी के संगम पर केंद्रित किया, जिसका परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।
शैक्षणिक और वित्तीय प्रतिभा का संगम
रवि पंडित की सफलता के पीछे उनकी मज़बूत शैक्षणिक नींव का बड़ा हाथ था। वे एक गोल्ड मेडलिस्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और उन्होंने विश्व प्रसिद्ध ‘एमआईटी स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट’ (MIT Sloan School of Management) से स्नातक किया था। एमआईटी जैसी संस्था से मिली प्रबंधन की समझ और सीए की वित्तीय दक्षता के संगम ने ही केपीआईटी को एक लाभदायक और टिकाऊ वैश्विक कंपनी बनाया।
उनके सहयोगियों का कहना था कि वे एक साथ जटिल तकनीकी इंजीनियरिंग और पेचीदा वित्तीय आंकड़ों को समझने की अद्भुत क्षमता रखते थे। यही कारण था कि केपीआईटी ने कई बड़े वैश्विक विलय और अधिग्रहणों (M&A) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
भारतीय ईवी (EV) क्रांति के गुमनाम नायक
अक्सर इलेक्ट्रिक वाहनों की चर्चा में हम केवल गाड़ी बनाने वाली कंपनियों के नाम जानते हैं, लेकिन रवि पंडित ने उस ‘अदृश्य परत’ पर काम किया जो हर आधुनिक ईवी को स्मार्ट बनाती है। केपीआईटी ने बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), पावरट्रेन सॉफ्टवेयर और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) में विशेषज्ञता हासिल की।
पंडित की दूरदृष्टि का ही परिणाम था कि केपीआईटी ने क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबल मोबिलिटी की ओर तब रुख किया, जब भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाज़ार अभी शुरुआती दौर में भी नहीं था।
समाज सेवा और पुणे के प्रति प्रेम
रवि पंडित केवल एक उद्योगपति नहीं थे, बल्कि वे एक विचारक और जागरूक नागरिक भी थे। उन्होंने पुणे के औद्योगिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘पुणे इंटरनेशनल सेंटर’ (PIC) के संस्थापक सदस्य के रूप में, उन्होंने जलवायु परिवर्तन और राष्ट्रीय नीतियों पर शोध को बढ़ावा दिया। वे “कॉरपोरेट विद कॉन्शियस” (सामाजिक चेतना वाला कॉरपोरेट) के विचार में दृढ़ विश्वास रखते थे। उनके लिए व्यवसाय केवल मुनाफा कमाने का ज़रिया नहीं था, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक माध्यम था।
इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “रवि पंडित केवल एक बिज़नेस लीडर नहीं थे, बल्कि वे एक दार्शनिक उद्यमी थे। उनमें बीस साल आगे देखने की अद्भुत क्षमता थी, लेकिन वे हमेशा वर्तमान की नैतिकता से जुड़े रहे। भारतीय आईटी उद्योग में उनका योगदान अतुलनीय है।”
मूल्यों की विरासत
केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के निदेशक मंडल ने एक भावुक बयान में कहा, “रवि केपीआईटी की आत्मा थे। उन्होंने इस संस्था को ईमानदारी, नवाचार और कर्मचारियों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के स्तंभों पर खड़ा किया। हालांकि उनकी शारीरिक कमी हमेशा खलेगी, लेकिन उनके द्वारा स्थापित मूल्य कंपनी के भविष्य के लिए ध्रुवतारे की तरह काम करते रहेंगे।”
रवि पंडित अपने पीछे अपनी पत्नी, पुत्र और दुनिया भर के हजारों ‘केपीआईटी-यंस’ का परिवार छोड़ गए हैं, जो उन्हें एक गुरु और पिता तुल्य व्यक्तित्व के रूप में देखते थे। उनका अंतिम संस्कार कल पुणे में होने की संभावना है, जिसमें आईटी और ऑटोमोटिव जगत की कई हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है।

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