अंकिता भंडारी हत्याकांड, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा से बच रही धामी सरकार: कांग्रेस
देहरादून: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र कुछ ही घंटों में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने पर धामी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे जनता की भावनाओं और करदाताओं के पैसे की बर्बादी बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनहित के गंभीर मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है।
गणेश गोदियाल ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्पष्ट करें कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने का उद्देश्य क्या था, जब सदन में जनता के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय ही नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक अंकिता भंडारी हत्याकांड, प्रदेश में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आम जनता की समस्याओं पर सरकार से जवाब मांगना चाहते थे, लेकिन इन विषयों पर चर्चा की मांग स्वीकार नहीं की गई।
सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र के नाम पर मंत्रियों, अधिकारियों और पूरे सरकारी तंत्र को वहां ले जाना तथा कुछ ही घंटों में वापस लौट आना जनता की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग है। यदि सत्र को कुछ ही घंटों तक सीमित रखना था, तो इसे देहरादून में भी आयोजित किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि जनसमस्याओं पर गंभीर चर्चा करना और सरकार को जवाबदेह बनाना होना चाहिए।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का वादा
गोदियाल ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं, राज्य आंदोलन के संघर्ष और लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक है। इसे केवल प्रतीकात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। गैरसैंण की गरिमा तभी कायम रहेगी, जब वहां नियमित रूप से पर्याप्त अवधि के विधानसभा सत्र आयोजित किए जाएंगे और जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा होगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गैरसैंण में विधानसभा भवन सहित अन्य परिसंपत्तियों का विकास पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ।
गोदियाल ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान प्रत्येक विधायक को अपने क्षेत्र की समस्याएं सदन में उठाने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। सरकार को जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभानी होगी। विधानसभा सत्र केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि जनता की आवाज उठाने, सरकार से सवाल पूछने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए होते हैं।

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