2026 में बिहार में खेल के नए युग की नियमबद्ध रूप से शुरुआत मानी जा रही है,यद्यपि 2 साल पहले 9 जनवरी 2024 को खेल विभाग द्वारा राजगीर खेल अकादमी और विश्वविद्यालय के गठन के रूप में इसकी नींव रख दी गई थी।खेल विभाग ने दो वर्षों में खेल को सामाजिक परिवर्तन और युवा सशक्तिकरण का आधार बनाया है। इसने अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का स्वागत किया, गाव-गांव तक खेल सुविधाएं पहुंचाई और ‘मसल’ जैसे प्रतिभा खोज से लाखों बच्चों को जोड़ने का काम किया।
पिछले कुछ वर्षों में खेल विभाग ने जो कदम उठाए हैं, उससे जिला मुख्यालयों से लेकर पंचायत स्तर तक विकसित खेल सुविधाओं ने बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए खेल को सुलभ बनाया है। खेल विभाग ने अवसंरचना को केवल भवन निर्माण तक सीमित न रखकर, बल्कि इसे अवसर प्राप्त करने का माध्यम बनाया है।
आज बिहार के गांव से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभर रहे हैं, प्रखण्ड स्तर के जिला खेल भवन, आउटडोर स्टेडियम साथ जिमनैजियम और गांव में विकसित खेल मैदानों ने खेल को शहरों की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का काम किया। वर्ष 2025 में 257 प्रखण्ड स्तरीय स्टेडियम का पूरा होना इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है।
विश्व स्तर पर बिहार का परिचय
एकलव्य स्पोर्ट्स स्कूलों और प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लगातार मार्गदर्शन और बेहतर सुविधा मिल रही है। बिहार अब केवल खिलाड़ियों को तैयार करने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय खेलों का आयोजन करने में भरोसेमंद मेज़बान बन चुका है। एशियन रग्बी सेवन्स, सेपकटाकरा वर्ल्ड कप, एशियन चैंपियन ट्रॉफी, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, हीरो एशिया कप हॉकी और ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि बिहार वास्तव में खेल मानक पर खरा उतरने की पूरी क्षमता रखता है। इन आयोजनों से न केवल राज्य की छवि बदली बल्कि, स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और युवाओं के आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा मिली है।
बिहार का उद्देश्य अब खेल हब बनना
खेल विभाग ने आधिकारिक स्तर पर अब बड़ा बदलाव करने की पहल कर दी है, पंचायत स्तर तक गठित खेल क्लबों ने स्थानीय नेतृत्व को मजबूत किया है, तथा वर्ष 2026 बिहार खेल विभाग के लिए विस्तार और आत्मविश्वास का वर्ष होने वाला है। बिहार को खेल आधारित विकास मॉडल की ओर ले जाने के लिए सात निश्चय योजना (3) के तहत पटना में जिला-विशेष खेल उत्कृष्टता केंद्र, एकलव्य खेल केंद्रों का सुदृढ़ संचालन, नई छात्रवृत्ति प्रणाली, स्पोर्ट सिटी और खेल प्रशासन में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां जैसी पहल शुरू की गई हैं।
खेल जगत में औपचारिक शुरुआत
इन दो वर्षों में बिहार खेल विभाग और खिलाड़ियों के आत्मविश्वास में काफी बढ़ोतरी हुई है, अतुल आत्मविश्वास से खेल विभाग ने यह सिद्ध कर दिया है कि खेल राज्य की पहचान और दिशा दोनों बदल सकता है। विकसित भारत 2047 और गौरवसाली बिहार 2047 के लक्ष्य के साथ, बिहार अब खेलों के साथ विश्व मंच पर अपनी मजबूत सहभागिता दर्ज कराने की ओर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 बिहार के लिए एक नए खेल युग की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है।

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