भारत में वैश्विक तकनीकी सम्मेल्न का आयोजन अक्सर दिल्ली और मुंबई जैसी बड़ी शहरों में ही होता है। लेकिन इस बारे एक नया दृष्टिकोण दिख रहा है। ब्लैक स्वान समिट इंडिया 2026 का आयोजन ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में हो रहा है – और यह सिर्फ एक मीटिंग नहीं बल्कि भारत की भविष्य की दिशा तय करने के लिये एक बहुत बड़ा मंच भी बन सकता है।
कई लोगों के लिये “ब्लैक स्वान” शब्द अभी भी कुछ ऐसी चीज से जुड़ा हो सकता है जो कोई दुर्लभ पक्षी या आर्थिक सिध्दांत हो। लेकिन दुनिया की तकनीक, वित्त और नीति-निर्माण की दुनिया में इसका अर्थ है – एक बड़ा बदलाव जो अचानक शामने आये, जो पूरी परिस्थिति को बदल दे! ओडिशा के लिये इस सम्मेलन की मेजबानी सिर्फ एक आयोजन नहीं है, बल्कि भारत और ओडिशा के लिए आर्थिक पहचान को फिर से बनाने की एक बड़ी दावेदारी है।
- यह सम्मेलन ओडिशा सरकार और ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क (GFTN) के बीच हुए समझौते का नतीजा है।
इस तरह की साझेदारियां इसलिए अहम हैं क्योंकि ये प्रदान करती हैं:
- वैश्विक पूंजी तक पहुंच
- अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों की समझ
- नवाचार के लिए प्रयोग का अवसर
- भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने का रास्ता
आज की दुनिया में तकनीक और नीति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। इस संदर्भ में यह पहल दूरगामी असर वाली है।
ब्लैक स्वान समिट के लिए ओडिशा को क्यू चुना गया?
ओडिशा की अर्थव्यवस्था कई दशकों से पारंपरिक क्षेत्रों पर निर्भर रही – खनन, कृषि, बंदरगाह और विनिर्माण। ये क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे एक पुराने आर्थिक मॉडल से जुड़े हुए हैं। आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में, जो राज्य और देश समय के साथ खुद को नहीं बदलते, वे पीछे छूट जाते हैं।
भारत का लक्ष्य साफ है – 2047 तक एक अग्रणी डिजिटल राष्ट्र बनना। इसके लिए:
- एक आधुनिक और मजबूत डिजिटल ढांचा की जरूरत होगी।
- वैश्विक स्तर की प्रतिभा का उन्मुखीकरण होगा।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत होगी।
- और एक ऐसा माहौल जिसे नवाचार और स्टार्टअप के लिए माहौल बनाया जा सके।
अब तक भारत की तकनीकी चर्चा कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रही है — बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे तक सीमित ही रही है। ओडिशा तो इस नक्शे में शामिल नहीं था।
असल में यही चुनौती थी की: एक राज्य, जहां पारंपरिक उद्योग हावी हों, वह कैसे फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंश्योरटेक जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में वैश्विक भूमिका निभा सकता?
यह सवाल न केवल आर्थिक है, बल्कि सामाजिक भी है। भारत की युवा आबादी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन अगर उन्हें उच्च-मूल्य वाले अवसर नहीं मिलते, तो यह ताकत असंतोष में बदल सकती है।
भविष्य की दिशा, रोज़गार और कौशल विकास
ब्लैक स्वान शिखर सम्मेलन 2026 ओडिशा के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। सम्मेलन का फोकस रोज़गार सृजन, कौशल विकास और भविष्य की तकनीकी तैयारी पर है। राज्य सरकार के अनुसार, अगले पांच वर्षों में 7,000 से अधिक युवाओं को AI, FinTech और InsurTech से जुड़े कौशलों में प्रशिक्षित कर रोजगार योग्य बनाने की योजना है। इसके लिए क्षमता केंद्र, सर्टिफिकेशन प्रोग्राम और निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य केवल नौकरी पैदा करना नहीं, बल्कि युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि वे भारत और विदेश दोनों जगह अवसर हासिल कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ओडिशा में प्रतिभा पलायन कम होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सम्मेलन की सबसे अहम विशेषता इसकी वैश्विक भागीदारी है। इसमें भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और अफ्रीकी व एशियाई देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। कुल मिलाकर 24 देशों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि ओडिशा अब वैश्विक डिजिटल संवाद का हिस्सा बन चुका है।

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