बैंकिंग क्षेत्र की शुचिता बनाए रखने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महाराष्ट्र स्थित ‘द शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड’ का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने सोमवार को घोषणा की कि यह बैंक अब आर्थिक रूप से सक्षम नहीं रह गया है, जिसके परिणामस्वरूप 6 अप्रैल, 2026 को कारोबार बंद होने के साथ ही इसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
आरबीआई के इस आदेश के बाद, अब यह बैंक न तो नया जमा स्वीकार कर सकता है और न ही पुराने पैसे वापस करने का सामान्य बैंकिंग लेनदेन कर सकता है। यह कार्रवाई आरबीआई द्वारा कमजोर सहकारी बैंकों के खिलाफ चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान का हिस्सा है।
लाइसेंस रद्द होने का मुख्य कारण
आरबीआई के आधिकारिक बयान के अनुसार, शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी और भविष्य में कमाई की कोई ठोस योजना भी नजर नहीं आ रही थी। बैंक ‘बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949’ की शर्तों को पूरा करने में विफल रहा। आरबीआई ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस बैंक का कामकाज जारी रहना जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ होता, क्योंकि बैंक अपने वर्तमान जमाकर्ताओं को पूरा पैसा वापस करने की स्थिति में नहीं था।
जमाकर्ताओं को कैसे मिलेगा पैसा?
जमाकर्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत, प्रत्येक जमाकर्ता को ₹5 लाख तक का बीमा कवर मिलता है।
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99.7% सुरक्षित: बैंक द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 99.7% जमाकर्ताओं को उनका पूरा पैसा वापस मिल जाएगा।
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अब तक का भुगतान: 31 जनवरी, 2026 तक, DICGC पहले ही ₹48.95 करोड़ का भुगतान पात्र जमाकर्ताओं को कर चुका है।
“आरबीआई का यह कदम जमाकर्ताओं को बड़े नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया है। ₹5 लाख तक का बीमा कवर यह सुनिश्चित करता है कि छोटे जमाकर्ताओं की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे,” डॉ. अरिंदम घोष, बैंकिंग विशेषज्ञ ने कहा।
आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCS) से अनुरोध किया है कि वे बैंक को बंद करने (winding up) की प्रक्रिया शुरू करें और एक लिक्विडेटर (परिसमापक) नियुक्त करें। लिक्विडेटर बैंक की संपत्तियों को बेचकर बचे हुए कर्जदारों से पैसा वसूल करेगा और जमाकर्ताओं के दावों का निपटारा करेगा।
शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक का बंद होना सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है। आरबीआई अब केवल उन्हीं बैंकों को चलाने की अनुमति दे रहा है जो आर्थिक रूप से मजबूत और पारदर्शी हैं। जमाकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने दावे के लिए बैंक द्वारा नियुक्त किए जाने वाले लिक्विडेटर के संपर्क में रहें और अपने सभी दस्तावेज तैयार रखें।

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